
"रीवा।"
दरवाजा खुला और दो लोग लड़खड़ाते हुए अंदर आए।
नशे में डूबे चेहरों के साथ, दोनों ने एंट्री गेट पर ही एक-दूसरे को किस करना शुरू कर दिया। कमरे में उनकी तेज सांसें और एक अजीब सी गर्माहट छा गई।
"आह..."
जैसे ही उस आदमी ने रीवा को अपनी बाहों में भींचा, उसके मुंह से एक हल्की सी चीख निकल गई।
छोटी और नाजुक सी दिखने वाली रीवा को एक हट्टे-कट्टे, बलवान पुरुष की गिरफ्त में देखना किसी के भी मन में हलचल पैदा कर सकता था।
वे सीधे बिस्तर की तरफ बढ़े। रीवा बिस्तर पर लेट चुकी थी और उस भारी-भरकम शरीर ने उसे अपने नीचे दबा लिया था।
उस आदमी की आँखें लाल हो रही थीं। इस वक्त उसकी आँखों से एक अलग ही आग बरस रही थी, जबकि आम दिनों में वह बेहद शांत और गंभीर दिखाई देता था।
ऐसा लग रहा था जैसे उसने अपने सोचने-समझने की शक्ति खो दी हो।
रीवा ने बेडशीट को इतनी कसकर पकड़ रखा था कि उसकी उंगलियां सफेद पड़ गई थीं। उसकी आँखें पल भर के लिए चमकीं।
कमरे की टिमटिमाती रोशनी में, उनकी भारी सांसों की आवाजें गूँज रही थीं।
"रीवा..."
"रीवा, उठो!"
रीवा अचानक चौंककर जाग बैठी। उसके माथे पर ठंडा पसीना आ चुका था।
'मुझे फिर से वही सपना आया।' पूरा एक महीना बीत जाने के बाद भी, वह मंजर हर रात उसके सपनों में लौट आता था।
उस दिन विश्वदीप का जन्मदिन था। रीवा बहुत चाव और उत्साह से विश्वदीप से मिलने गई थी, लेकिन विश्वदीप ने न सिर्फ उसे, बल्कि डिपार्टमेंट के बाकी दोस्तों को भी बुलाया था। उनमें काव्या भी शामिल थी, जो अपनी खूबसूरती के लिए जानी जाती थी। वे दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब बैठे थे और ऐसे टच हो रहे थे, जैसे उनके बीच कुछ गलत ही न हो।
वहाँ मौजूद कई लोग रीवा की तरफ देख रहे थे, मानो वे उसकी प्रतिक्रिया देखना चाहते हों।
रीवा और विश्वदीप एक ही सब्जेक्ट में थे लेकिन उनकी क्लास अलग थी। कॉलेज का हर बच्चा जानता था कि रीवा पिछले दो साल से विश्वदीप को पसंद करती थी। यहाँ तक कि विश्वदीप खुद भी यह बात अच्छे से जानता था, फिर भी उसने कभी उसे सीधे तौर पर मना नहीं किया था।
लेकिन आज दोस्तों के हाव-भाव देखकर ऐसा लग रहा था कि काव्या और विश्वदीप के बारे में सबको पहले से ही पता था। सिर्फ रीवा ही एक बेवकूफ की तरह थी, जिसे इस बारे में हवा तक नहीं थी।
इसी बीच, विश्वदीप काव्या की कमर में हाथ डाले बैठा था और सबके सामने उससे फ्लर्ट कर रहा था।
अपने दोस्तों की तरस भरी और मजाकिया नजरों से आहत होकर, रीवा ने फैसला कर लिया कि वह इस एकतरफा प्यार को यहीं खत्म कर देगी, जो अब सबका मजाक बन चुका था।
उस दिन अंदर से टूट चुकी रीवा ने हद से ज्यादा शराब पी ली थी। वॉशरूम जाते समय, नशे की हालत में वह लड़खड़ाकर किसी से टकरा गई। तभी उसकी नजर उस आदमी की गहरी और नशीली आँखों पर पड़ी।
वह शख्स विश्वदीप से कहीं ज्यादा हैंडसम और मर्दाना था।
रीवा ने नशे के सुरूर में बिना कुछ सोचे-समझे, एक ठंडी सांस ली और उस आदमी का कॉलर पकड़ लिया।
"क्या तुम मेरे साथ सोना चाहते हो?"
इसके बाद जो हुआ, वह साफ था। दोनों एक साथ एक होटल में गए और पूरी रात वहीं बिताई।
अगली सुबह जब रीवा का नशा उतरा, तो वह खुद को एक अजनबी आदमी के साथ बिस्तर पर बिना कपड़ों के देखकर दंग रह गई। उसने घबराहट में जल्दी-जल्दी कपड़े पहने और भागते हुए होटल से निकल गई।
रीवा जानती थी कि उससे बहुत बड़ी गलती हो गई है।
इसीलिए वह इस बारे में किसी को कुछ बता नहीं सकी, और न ही वह कभी यह जान पाई कि वह आदमी आखिर था कौन।
लेकिन चूंकि वह बात उसके दिमाग में घर कर गई थी, इसलिए आज एक महीने बाद भी, लगभग हर रात उसे वही सपना आता था।
एक-दूसरे से लिपटे हुए जिस्म, वे तेज सांसें और उस आदमी की वो गहरी निगाहें...
"रीवा, उठो भी! तुम कहाँ खोई हुई हो? क्या सेमेस्टर के पहले ही दिन लेट होने का इरादा है?"
जूही की आवाज सुनकर रीवा होश में आई। उसने सपने के उन धुंधले दृश्यों को दिमाग से झटका और झटके से बिस्तर से उठ गई।
मुंह-हाथ धोने के बाद, रीवा ने अपना बैग उठाया और जूही के साथ क्लास की तरफ दौड़ पड़ी।
"इतनी जल्दी क्या है?" रीवा के लिए जूही की तेज रफ्तार के साथ चलना मुश्किल हो रहा था।
"तुम भूल गई क्या कि आज हमारी एनाटॉमी की क्लास है?" जूही ने कहा, "आजकल तुम्हारा दिमाग ठिकाने पर नहीं रहता। तुम्हें कुछ याद ही नहीं रहता।"
तभी रीवा को याद आया कि कॉलेज ने एक बहुत ही काबिल एनाटॉमी प्रोफेसर को रखने के लिए पानी की तरह पैसा बहाया था। वे प्रोफेसर दुनिया के सबसे मशहूर मेडिकल कॉलेज, 'जॉन्स हॉपकिंस स्कूल ऑफ मेडिसिन' से पढ़ाई पूरी करते ही यहाँ आए थे। कहा जाता है कि वे कॉलेज के इतिहास के सबसे कम उम्र के प्रोफेसर हैं।
कुछ पर्सनल कारणों से प्रोफेसर वक्त पर नहीं आ पाए थे, इसलिए कॉलेज को एनाटॉमी की क्लास पूरे एक महीने के लिए टालनी पड़ी थी। छुट्टियों के बाद जब वे कॉलेज लौटे, तो पहली क्लास उन्हीं प्रोफेसर की थी।
"रीवा, तुम्हें पता है? सुना है आज सुबह किसी ने उन प्रोफेसर को देखा था।" जूही ने बेहद एक्साइटेड होकर कहा।
"लोग कह रहे हैं कि प्रोफेसर दिखने में कमाल के हैं। उनका लेवल ही अलग है! इसी वजह से पूरे कॉलेज में खलबली मची हुई है। जिन्होंने उनकी क्लास नहीं चुनी, वे अब हाथ मल रहे हैं।"
जूही ने रीवा का हाथ खींचते हुए कहा, "जल्दी चलो! देर हुई तो बैठने की जगह भी नहीं मिलेगी।"
रीवा को लगा कि यह कुछ ज्यादा ही बढ़ा-चढ़ाकर कहा जा रहा है। वे अब थर्ड ईयर के स्टूडेंट थे और एनाटॉमी की क्लास सुबह के पहले ही पीरियड में होती थी। आमतौर पर तो छात्र सुबह उठ नहीं पाते थे और अपने दोस्तों से प्रॉक्सी (फर्जी हाजिरी) लगवा लेते थे, जिससे क्लास अक्सर खाली ही रहती थी।
लेकिन जैसे ही रीवा क्लास के सामने पहुँची, वहाँ की भीड़ देखकर उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं।
ऐसा नजारा कॉलेज में पहले कभी नहीं देखा गया था।
जूही को इस बात का अंदाजा पहले से ही था।
"वह हैंडसम भी हैं और उनका बैकग्राउंड भी तगड़ा है, यानी वह हर तरह से परफेक्ट हैं।" कहते हुए वह रीवा को खींचकर अंदर ले गई।
"जरा रास्ता दीजिए, हमें अंदर जाने दीजिए। जो लोग सिर्फ देखने के लिए आए हैं, प्लीज हमारे स्टूडेंट्स के लिए सीटें खाली कर दें!" जूही चिल्लाई।
काफी मशक्कत के बाद एक खाली सीट ढूंढकर जैसे ही जूही बैठी, उसकी नजर किसी पर पड़ी और उसका चेहरा चिढ़ से भर गया।
"आज सुबह-सुबह ही मेरा मूड खराब हो गया।"
रीवा ने भी उसी तरफ देखा। उसके ठीक आगे वाली सीट पर विश्वदीप और काव्या बैठे हुए थे।
कॉलेज की कुछ जरूरी क्लास बड़े लेक्चर हॉल में पूरे डिपार्टमेंट के साथ होती थीं, लेकिन रीवा को उम्मीद नहीं थी कि एनाटॉमी की क्लास में ही उनका सामना हो जाएगा।
वे दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब थे। विश्वदीप ने काव्या के कान में कुछ फुसफुसाया, तो काव्या ने शर्माते हुए अपने मुंह पर हाथ रख लिया और हंसने लगी।
जूही ने जब देखा कि रीवा उन्हें ही घूर रही है, तो उसने एक ठंडी सांस ली।
"अब मैं समझी कि तुम आजकल इतनी खोई-खोई क्यों रहती हो। जिस लड़के पर तुम्हें दो साल से क्रश था, वह किसी और को डेट कर रहा है... बुरा लगना तो लाजमी है।"
यह सुनते ही रीवा ने चौंककर जूही की तरफ देखा।
"क्या वे दोनों सच में डेट कर रहे हैं?"
"हाँ! सब कह रहे हैं कि विश्वदीप के बर्थडे वाले दिन से ही दोनों का चक्कर चल रहा है। तुम ऐसा मुंह क्यों बना रही हो? क्या तुम्हें आज ही पता चला?"
रीवा ने धीरे से कहा, "हाँ, मुझे अभी-अभी अहसास हुआ।"
"तो फिर तुम इतने दिनों से इतनी बेफिक्र कैसे घूम रही थीं?" सेमेस्टर शुरू हुए एक महीना हो चुका था, इसलिए जूही का ऐसा सोचना जायज था।
रीवा में यह सच बताने की हिम्मत नहीं थी कि उसने नशे में किसी अजनबी के साथ रात बिताई थी। जब उसने कोई जवाब नहीं दिया, तो जूही ने उसके कंधे पर हाथ रखा और सांत्वना देते हुए बोली:
"चलो, कोई बात नहीं। मैं तुम्हारी भावनाएं समझ सकती हूँ।"
"वैसे यह सच भी है। विश्वदीप हैंडसम है और पढ़ाई में भी अच्छा है, लेकिन इसके अलावा उसमें ऐसा क्या खास है? उस जैसे मतलबी इंसान के पीछे अपनी जिंदगी खराब करने की कोई जरूरत नहीं है। इस दुनिया में विश्वदीप से कहीं ज्यादा हैंडसम और अक्लमंद लोग हैं। हमारे नए प्रोफेसर को ही देख लो!"
"विश्वदीप तो उनके सामने कुछ भी नहीं है। रीवा, तुम किसी और पर ट्राई क्यों नहीं करती?"
रीवा ने हैरान होकर पूछा, "किस पर?"
जूही ने चुटकी लेते हुए कहा, "हमारे नए प्रोफेसर कैसे रहेंगे?"
जूही कुछ भी बोल सकती थी। रीवा ने मजाक में जूही के माथे पर एक हल्की सी चपत लगाई।
"तुम कुछ भी बकवास करती हो!"
तभी अचानक पूरी क्लास में शोर मच गया।
"वह आ गए! प्रोफेसर आ गए!"
जो क्लास अभी तक गपशप से गूँज रही थी, वहाँ अचानक हलचल बढ़ गई। सब लोग अपनी गर्दनें उठाकर दरवाजे की तरफ देखने लगे। रीवा भी खुद को रोक नहीं पाई और देखने लगी।
वह भी बस यह जानने के लिए उत्सुक थी कि नए प्रोफेसर सच में कितने हैंडसम हैं।
'क्या कोई सचमुच इतना अवास्तविक रूप से सुंदर हो सकता है?'
तभी क्लास के दरवाजे पर एक लंबा और छरहरा शख्स आकर रुका।
उनका कद काफी ऊंचा था और चेहरा किसी मॉडल जैसा attractive था। तीखी ठुड्डी, एकदम सीधी नाक और परफेक्ट होंठ... उनकी गहरी आँखें ऐसी थीं, मानो सीधे इंसान के दिल में झांक रही हों। उनका राजसी और Sophisticated किसी को भी अपना दीवाना बना दे।
जूही ने महसूस किया कि उसके बगल में बैठी रीवा की सांसें थम सी गई हैं।
"रीवा, मैंने कहा था ना! देखो, वह सच में बहुत ज्यादा हैंडसम हैं।" जूही बुदबुदाई।
लेकिन रीवा... वह अब तक बेंच पर पूरी तरह ढह चुकी थी।
To be continued...


Write a comment ...