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शुरुवात या अंत

एक आलीशान मेंशन के हॉल में... बीचों-बीच एक प्यारा सा ब्लू कलर का केक रखा था। वहीं एक 26 साल की स्वाती और एक 5 साल की छोटी सी आध्या खड़ी... किसी का इंतज़ार कर रही थीं।

तभी आध्या, अपनी क्यूट-क्यूट आवाज़ में पूछती है— 

"मम्मा, हम डैड के साथ केक कट करने वाले थे ना... वो अभी तक क्यों नहीं आए?"

बेटी की बात सुनकर, स्वाती ने फोन में "अभिनव" के 17 मिस्ड कॉल्स का रिकॉर्ड देखा... और नज़रें झुका लीं। उसने आखिरी बार कॉल लगाने की हिम्मत की... पर हार मानकर फोन साइड में रख दिया।

"डैड बिज़ी हैं बेटा... आध्या, तुम मम्मा के साथ कैंडल्स बुझाओगी?" एक फेक स्माइल के साथ स्वाती बोली।

आध्या, जो उम्र से ज़्यादा समझदार हो गई थी, उसने मम्मा के गाल सहलाए। 

"ओके मम्मा... मैं हमेशा आपके साथ हूँ!"

माँ-बेटी केक कट करने वाली थीं, तभी फोन की स्क्रीन फ्लैश हुई। 

कॉल करने वाला कोई और नहीं... अभिनव था। स्वाती ने आन्सर किया, तो दूसरी तरफ से बस एक ठंडी, ऑर्डर देने वाली आवाज़ आई— 

"मुझे लेने आओ।"

कुछ देर बाद स्वाती उस क्लब के प्राइवेट रूम में पहुँची... जहाँ अभिनव था। एड्रेस मेसेज में था।

जैसे ही उसने दरवाज़े का हैंडल पकड़ा और खोलने वाली थी, अंदर से आवाज़ आई... 

"अभिनव, मैंने सुना है तुम फिर से रितिका के साथ अमेरिका जा रहे हो?"

सोफे पर अभिनव बैठा था... ब्लैक शर्ट के 2 बटन खुले... फुल 'डेंजरस-बट-हैंडसम' वाइब कॉलर बोन पर लाइट पड़ रही थी... वो दिख ही रहा था एकदम फिल्मी हीरो जैसा। देखने वाले को समझ ही नहीं आता... उसके पास जाए या दूर रहे?

"हुँह।" अभिनव बस इतना ही बोला।

"इस बार कितने टाइम के लिए? 15 दिन? 1 महीना?" किसी ने फिर पूछा।

दरवाज़े के बाहर खड़ी स्वाती... उसे सब पता था। हर साल अभिनव रितिका के साथ देश छोड़कर जाता है... और महीनों वापस नहीं आता। उन्हें 'क्वालिटी टाइम' स्पेंड करना होता है... ये स्वाती अच्छे से जानती थी।

"सोचो यार... तुम और स्वाती इतने सालों से साथ रह रहे हो। तलाक कब लोगे? चोपड़ा फैमिली वेट कर रही है। वैसे..." कोई हँसते हुए बोला।

तभी किसी ने गला साफ किया... और सब एकदम चुप। क्योंकि उन्हें पता चल गया था कि अभिनव के 'ज़ख्म' को छू लिया गया है।

सच बोलें तो... स्वाती नहीं होती तो अभिनव ने कब का रितिका से शादी कर ली होती। पर 'उसने' जो किया... उसकी वजह से सब बर्बाद हो गया।

किसी ने माहौल हल्का करने के लिए मज़ाक में कहा— 

"अभिनव, तुम स्वाती की वजह से डिस्टर्ब तो नहीं हो रहे ना?"*

अभिनव के होंठ थोड़े ऊपर हुए... उसे ये बात फनी लगी। व्हिस्की का ग्लास घुमाते हुए वो ताने में बोला— 

"क्या रे, तूने ज्यादा ड्रिंक किया है क्या?"

हाहाहाहा ... चारों तरफ हँसी गूँज उठी।

अभिनव को सबसे ज़्यादा नफ़रत स्वाती से है। 5 साल शादी को हो गए, फिर भी उसके दिल में उसके लिए 'प्यार' का एक कतरा भी नहीं है।

"वो नशे में है... फुल नशे में। अभिनव को स्वाती जैसी 'क्रुएल' औरत क्यों पसंद आएगी जो किसी भी लेवल तक जा सकती है? अगर उसने अभिनव को ड्रग ना दिया होता और वो प्रेग्नेंट ना हुई होती... तो क्या वो उससे शादी करता? वो बस दादी के तानों से तंग आकर शादी कर बैठा... उसे मानना तो रियल में बहुत बड़ा इन्सल्ट है!"

ये सब अंदर से सुनकर, स्वाती ने दरवाज़े का हैंडल और ज़ोर से पकड़ लिया... नाखून गड़ गए।

"स्वाति, तुम यहाँ क्या करने आई हो?"

साइड से आवाज़ आई। स्वाती ने मुड़कर देखा... पर्पल शॉर्ट ड्रेस पहने रितिका उसे नफ़रत से घूर रही थी।

"स्वाती यहाँ क्यों आई है? कौन जाने? बिल्कुल एक चिपकू चीज़ की तरह। यहाँ तुम्हारा वेलकम कौन करेगा? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई इतनी बेशर्मी से यहाँ आने की?" लोगों के ताने सुनकर स्वाती ने मुट्ठी भींच ली वो कोई बहाना नहीं बना सकती थी... और बनाना भी नहीं चाहती थी। जो होना था वो हो चुका था।

नफ़रत भरी नज़रों को इग्नोर करके, स्वाती अंदर गई और सोफे पर बैठे अभिनव से बोली— 

"मैं तुम्हें लेने आई थी। चलोगे?"

आखिरकार अभिनव की नज़रें स्वाति पर पड़ीं। आज उसने गुलाबी-पीली ड्रेस और बेज स्वेटर पहना था। नो मेकअप... फिर भी वो दिन जैसी सुंदर लग रही थी पर वहाँ बैठे लोगों को लगा... 'ये सब नाटक है'।

रितिका ने ताने में स्माइल दी— 

"स्वाती, पहले बैठो ना! सब लोग तो बस इत्तेफाक से यहाँ हैं..."

स्वाती कुछ बोलती, उससे पहले ही अभिनव की बर्फ जैसी ठंडी आवाज़ आई— 

"तुम्हें यहाँ आने को किसने कहा?"

उस सवाल में 0% प्यार था... 100% इन्सल्ट था। स्वाती का दिल चकनाचूर हो गया कुछ लोग तो ये सुनकर हँस पड़े। 

"इसे अपनी औकात पता नहीं है। क्या ये खुद को कपूर फैमिली की असली मालकिन समझती है?"

लोगों की हँसी और उंगली उठाने को सहते हुए, स्वाती ने उस आदमी की ठंडी नज़रों से नज़र मिलाई।

"तुमने मुझे मेसेज किया था... 'आकर मुझे ले जाओ'।"

एकदम... चारों तरफ से हँसी और ताने के फटाके फूटे

"स्वाती, समझी क्या? अभिनव ज़िंदगी भर तुम्हें देखना नहीं चाहेगा, तो वो तुम्हें लेने क्यों बुलाएगा? तुम अभिनव को कंट्रोल करने के लिए, कम से कम कोई अच्छा बहाना तो ढूंढो।"

कैंची से काटे जाने जैसा दर्द धीरे-धीरे स्वाती की सीने से पूरे शरीर में फैल गया उसे पक्का यकीन हो गया... आज फिर उसके साथ धोखा हुआ है। ये सोचकर, स्वाती ने बिना रुके वहाँ से जाने का फैसला किया।

तभी अभिनव सोफे से उठा। 

*"अभिनव?"* रितिका ने उसकी स्लीव पकड़ी।

अभिनव ने कोट उठाया, रितिका का हाथ झटक कर आगे बढ़ गया। पर उसके एक्सप्रेशन के उल्टा, उसकी आवाज़ बहुत सॉफ्ट थी— 

"काफी लेट हो गई है, तुम्हें भी जल्दी घर जाना चाहिए।"

बात खत्म करके उसने नज़रें स्वाती की तरफ घुमाईं। साइड में बैठे दोस्त ने तुरंत बोला— 

"चिंता मत कर भाई! मैं रितिका को सेफ घर पहुँचा दूँगा!"

रितिका ने गुस्से का नाटक किया— "किसे भाई-बहन बोल रहे हो?"

स्वाती का चेहरा एकदम पीला पड़ गया एक पल को उसे समझ नहीं आया क्या करे। अभिनव उसके पास आया, उसकी नज़रें सिर्फ उस पर— 

"ऐसे खोई-खोई क्यों खड़ी हो? रुककर मेरे साथ खेलना चाहती हो?" उसकी आवाज़ में ज़हर भरा था। क्योंकि अगर स्वाती वहीं रुकती, तो ये लोग उसे खा जाते। स्वाती बिना कुछ बोले उसके पीछे-पीछे बाहर चली गई। पर जाते वक्त उसे कमरे के अंदर की आवाज़ साफ सुनाई दी—

"क्लियर है... उसे डर है कि ये दादी के पास जाकर कंप्लेंट कर देगी... इसीलिए इसके पीछे जा रहा है।"

वापसी में अभिनव पैसेंजर सीट पर चुपचाप बैठा रहा। उसकी गहरी आँखें और एक्सप्रेशनलेस चेहरा... कोई भी समझ सकता था कि वो बैड मूड में है। स्वाती ने विला तक बस गाड़ी चलाने पर ध्यान दिया... शांत।

उसे पता था कि आज फिर उसने अभिनव का मूड खराब कर दिया है... इसीलिए उसने उसके सामने घूमने के बजाय आध्या के रूम में रात बिताने का प्लान बनाया।

पर जैसे ही वो मास्टर बेडरूम के पास से गुज़र रही थी, अभिनव ने उसका हाथ पकड़ा और एकदम अंदर खींच लिया। स्वाती कुछ समझ पाती, उससे पहले उसने उसे बेड पर धकेल दिया और अपने नुकीले दाँतों से उसका कान काट लिया दर्द से स्वाती काँप उठी।

"तुम्हें किसने कहा था मुझे ढूँढने आओ? हाँ?"

एक पल में उसे पलटकर, पोज़िशन बदल गई। अब स्वाती नीचे... अभिनव ऊपर। उसके टच से स्वाती की आवाज़ काँपने लगी, जब उसने उसकी ठुड्डी पकड़ी और उंगली से सहलाने लगा।

"तुम... तुम क्या कर रहे हो?"  उसने डरते हुए पूछा।

"झूठ बोलने की सज़ा मिलनी चाहिए! आज की रात... लिमिट के बाहर जाएगी!"

स्वाती मना करने वाली थी, तभी अभिनव ने उसकी पतली कमर पर ज़ोर से चुटकी काटी। उसकी हल्की सी सिसकारी वासना से भरी थी, और उसकी आँखें खतरनाक चमक रही थीं... जैसे वो उसे पूरा ही निगल जाएगा।

जब उसकी उंगली ठुड्डी से नीचे सरकते हुए एक जगह रुकी... और गोल-गोल घुमाने लगी... स्वाती का शरीर ढीला पड़ गया और उसने एक गहरी साँस छोड़ी।

"अगर तुम ऐसा करती हो... तो ये बस एक बार होता है। पर अगर मैं करता हूँ... तो ये एक बार पर रुकता नहीं। चॉइस इज़ योर्स।"

To be continued...

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