
दादी की बात सुनकर अभिनव ने कुछ पल तक कोई जवाब नहीं दिया। फिर उसने बहुत धीरे से अपनी नज़रें घुमाईं और आध्या की तरफ देखा। नन्ही-सी आध्या अपनी बड़ी-बड़ी मासूम आँखों से सिर्फ उसे ही देख रही थी। उन आँखों में बहुत सारी उम्मीद थी, थोड़ा-सा डर भी था और सबसे ज़्यादा था... अपने डैड के लिए बेइंतहा प्यार।
अभिनव की नज़र जैसे ही उन मासूम आँखों से मिली, उसके सीने में दबा हुआ दर्द एक बार फिर आँखों में उतर आया। उसने तुरंत अपनी नज़रें फेर लीं। चेहरे पर आए इमोशन्स को कंट्रोल करने में उसे कुछ सेकंड लगे। फिर उसने खुद को संभाला और आध्या को अपने साथ लेकर वहाँ से निकल गया।


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